एक अकेला जुगनू था वो कितनो से वो हार गया
मेरी धैर्य परीक्षा देखो ,यह सीमा से बाहर गया
दिल में चुभा एक तीर जो अंतर-मन में पार गया
जग में जीता खूब सिकंदर अपनों से ही हार गया
कवि दीपक बवेजा सरल
(भरतपुर राजस्थान )
एक बच्चा जो अपनी माँ से बिछड़ कर कहीं बाहर रह राहा है और वह माँ को याद करते हुए एक कविता इस प्रकार लिखता है और अपना प्यार माँ के प्रति व्यक्...
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