सच वह देखे तो पसीना आ जाए

झूठ के पांव पर खड़े रहना ठीक लगे उसको
सच मगर वह देखे , तो पसीना आ जाए ।
मेरे दाता हर किसी को ऐसी रोशनी बक्सों,
कि, उसको मरने से पहले जीना आ जाए।।
✍कवि दीपक सरल
एक बच्चा जो अपनी माँ से बिछड़ कर कहीं बाहर रह राहा है और वह माँ को याद करते हुए एक कविता इस प्रकार लिखता है और अपना प्यार माँ के प्रति व्यक्...
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