बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

दर्द के आंसू दर्द ही जाने….

 दर्द के आंसू दर्द ही जाने….

कौन किसी का दुख पहचाने


मरहम पर हर दर्द छिपा है

इसका मर्म अब कौन है जाने


दुख से दुख को लिखने वाला

अंतर्मन से खुद पहचाने


दर्द भी यहां खुशी से मिलता

क्यों चला दिल ,दिल लगाने


कवि दीपक बवेजा सरल

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