दर्द का आलम दर्द ही जाने
रोकर देखूं दिल पहचाने
मेरे दिल में इतना कुछ है
चल पड़ता मैं उसे बताने
दीपक बवेजा सरल
एक बच्चा जो अपनी माँ से बिछड़ कर कहीं बाहर रह राहा है और वह माँ को याद करते हुए एक कविता इस प्रकार लिखता है और अपना प्यार माँ के प्रति व्यक्...
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