कौन सुनेगा चीखें मेरी , कौन जख्म को भर देगा
वे घर हुआ है दिल मेरा अब, कौन इसको घर देगा
आधी चल दी दिया भुजा के ,सूरज गया क्षितिज में
कौन भुजाए प्यास किसी की कौन अब दुःख हर देगा
दीपक बवेजा सरल
एक बच्चा जो अपनी माँ से बिछड़ कर कहीं बाहर रह राहा है और वह माँ को याद करते हुए एक कविता इस प्रकार लिखता है और अपना प्यार माँ के प्रति व्यक्...
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