कलम दी थी मगर , हमको हुनर नहीं आया
रास्तों मै रहा मुसाफिर ,कभी घर नहीं आया
करीब रहा वो ,मेरा साया ,मेरा हमसफ़र बनके
जब तलक उसका मुझसे दिल भर नहीं आया
कवि दीपक बवेजा
8952008042
एक बच्चा जो अपनी माँ से बिछड़ कर कहीं बाहर रह राहा है और वह माँ को याद करते हुए एक कविता इस प्रकार लिखता है और अपना प्यार माँ के प्रति व्यक्...
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